Thursday, September 29, 2011

Shayari

आजकल नींद कम ख्वाब ज्यादा आते हैं
ख्व्वाब से भी न जाने हम कब नींद में लौट आते हैं
हर पल पलकों में बस उनकी तस्वीर नज़र आती है
शायद इसी वज़ह से हम नींद में भी मुस्कुराते हैं !!!

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