Saturday, July 14, 2012

Monsoon

बारिश की जब बूंदे पड़ीं
दिल बोला चल छुप ले कहीं

भीग गये तो ज़ुकाम हो जाएगा
काम काज को छोड़ डॉक्टर याद आएगा

बारिश को कोस हम चल पड़े छुपने कहीं
नज़र पड़ी एक किसान पे जो खड़ा था वहीं

देख आसमान को हाथ फैलाए वो दुआ देने लगा
जेब में रखा कपड़ा निकाल वो ज़ोर ज़ोर रोने लगा

इस बार खेती कर दो आनाज़ मैं उगायूंगा
दो वक़्त की रोटी मिल जाएगी इतना धन मैं कमायूंगा

शायद मेरा कोई अपना पैसो के अभाव में ना मर जाएगा
आज हर किसान लगान का घनन घनन फिर गाएगा

उस किसान की बातें सुन मैं भाव विभोर हो गया
ज़ुकाम का डर तो मानो बूँदो के साथ कहीं बह गया !! --Aj

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